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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

कौन रहबर है इसका पता तो चले। 

मैं अगर थक गया काफिला तो चले। 


 ❤️

 हम चिराग़ों को जलने का आए हुनर। 

सामने से मुखालिफ हवा तो चले। 

❤️ 

किस लिए हो खफा,किस लिए गमज़दा। 

मेरी गुस्ताखियां कुछ पता तो चले।

 ❤️

 हां इफाका न होगा मेरे मर्ज़ में।

 चारागर मेरे,मेरी दवा तो चले। 

❤️

 बात शुरुआत हो, इक मुलाकात की। 

पास बैठो मेरे सिलसिला तो चले। 

❤️

 न "सगी़र" अब ज़माने की परवाह हो। 

दूरियां जितनी हैं सब मिटा तो चले।


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